Saturday, December 26, 2009

उदास हुं मैं!!!( I am sad)

कल की सोचके खुश मैं था

सपने में भी सपना देख रहा था,

पर पता नहीं कुछ भूल रहा था मैं,

कुछ कम्मी महसूस कर रहा था,

आज उदास हुं मैं!!!

अकेलापन सा लगने लगा,

सब साथ और ठीक है समझाने लगा,

क्या कमी है नहीं पता

दोस्तों को phone मिलाये पर no use,

आज उदास हुं मैं!!!

रहता हुं मैं हमेशा रेचार्गे,

पर क्यूँ हुं आज मेरी battery discharge,

नया घर, नया room में हुं ,
पर idea नहीं कर पा रहा हुं gloom ,
आज उदास हुं मैं!!!

बात नहीं कर पा रहा हुं,
पर बिना बात के रह भी नहीं पा रहा हुं,
अपनी बात बोलना चाहता हुं,
पर किस्से कहू, सोच रहा हुं,
उदास हुं मैं !!!



In English Font,


Kal ki sochke khush me tha,

Sapne me bhi sapna dekh raha tha,

Par pata nahi kuch bhool raha tha,

Kuch kammy mahsus kar raha tha,

Aaj udaas hu main!!!

Akelapan sa lagne laga,

Sab saath hai samjhane laga,

Kya kammy hai nahi pata,

Dosto ko phone milaye par no use,

Aaj udaas hu main!!!

Rahta hu main hamesha recharge,

Par kyun hu aaj meri batterydischarge,

Naya ghar, naya room,

Par idea nahi kar paa raha hu gloom,

Aaj udaas hu main!!!

Baat nahi kar paa raha hu,

Par bina baat ke rah bhi nahi paa raha hu,

Apni baat bolna chahta hu,

Par kisse kahu, soch raha hu,

udaas hu main!!!

Saturday, November 21, 2009

Bhagavat Gita and ME

Last week I participated in इस्पर्धा (debate) at Yuva Kendra on the topic “The indwelling god of Bhagavad Gita enriches Humanity”. Though I had sufficient time, I was not able to prepare the script for it. One night before the event, finally I sat done for the script. Around 1 o’clock in the morning, I was just half done and couldn’t last more. The following was my final draft of the script.


I contribute to today’s world !!!! Do i??

From childhood school to college and offices,

I wore different faces for materialistic aces,

Just like all other Homo-Sapiens.

Knowing something about everything had become my passion,

Knowing everything about even one thing was not in my action,

Left with no aim I wasted all my talent and perfection.

I contribute to today’s world !!!! Do i??

This was my past,

‘cos I got Bhagavat Gita at last,

With Dadaji’s Swadhya I have entered Divine Brain Test Class,

With Divine Brotherhood I renewed my knowledge of Heritage,

Now my life has essence of Upnishads and Veds.

A selfless attitude and love has reawaken,

And all the barriers of difficulties are getting broken,

With Street play and धनञ्जय क्रीड़ा(Sports meet)

I have gained an aim,

To spread the spirit of gita to the Last Human Remains.

I contribute to today’s world !!!! Yes I Do.

With भाव-फेरी and भक्ति-फेरी

I have replenished the indwelling god in My Heart,

What to say about त्रिकाल संध्या(

I am rejoicing my ancestor’s life of art.


I tried to complete this poem---article—speech but I was not able to push my sleep and dream that hard.

Sunday, October 11, 2009

नवरात्रों में पूजा विधि का सिधांत!!!

क्या आपने कभी सोचा है किहम नवरात्रों में मिटटी के बर्तन में "जो" बोते है या मिटटी का कलश , रुई की ज्योत जलाते है और फ़िर शक्ति की उपासना क्यों करते है ?
इन सबके पीछे क्या सिधांत है ये हम सब को नही पता होगा | अगर हम आदिमानव से मानव बने के इठिहास को देखे तो हम कुछ जान पाए की वोह सिधांत मानव की प्रकृति पर फत्ते की है | ये मानव ने चार कला सीखने से पाई है | आदिमानव सबसे पहले बाकि जीवो कि तरह पशु-पक्षी का घोष खाके अपनी भूख मितया करता था | इस कारण वोह बंजारों की तरह जगह-जगह घूमता-फिरता रहता था | यदि मानव एक जगह ठरेगा नही तो संस्कृति को कैसे टिका पायेगा ?
पहली जीत तब हुयी जब मानव ने अन्न को बोना और उगाना सिखा | इस प्रकार से मानव का एक जगह रुका, और ये भी सीखा की अगर कुछ बोगे तोह ही उगेगा , इसलिए हम जो यानि अन्न बोते है | दूसरी फ़तह कपास यानि वस्त्र बुनना सीखना था | इससे वह गर्मी और सर्दी में रहने में शत्षम हो पाया, इसलिए हम रुई की ज्योत इस्तिमाल करके है | तीसरी फतह अग्नि यानि आग सीखने से हुयी | इससे वह पशु-पक्षी से निडर होकर और पक्का भोजन का सेवन करने लगा, इसलिए हम अग्नि की ज्योति जलाते है | चोथा और आखरी कला जो मानव ने सीखी, जिससे वह प्रकृति पर विजय पा सका, वह है मिटटी से घडा बनने की कला | ये इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर कुछ रखना हो कहाँ रखे ? इसलिए हम मिटटी का बर्तन या गमला में रेते में जो बोते है या मिटटी का बना कलश रखते है |

अगर प्रकृति को हम कृतज्ञता व्यत करते है | अब आप ये समझ गए है की हम नवरात्रे में पूजा ऊपर लिखित तरीके से क्यों करते है |

Friday, September 25, 2009

tum dur ho par pass bhi

तुम दूर हो पर पास भी
अकेले है हम पर गम नही
किसीको क्या बताये की हम कम नही
चल रहे थे बिन मंजिल के रास्ते पर
ख़ुद की ख़बर नही ............

तुमने ही तो रास्ता बताया
मंजिल क्या है ये समझाया
न समझ थे हम अबतक
प्यार क्या है तुमने दिखाया ...........

दीवाना बन गया हु
जो तुम ना मिले
मीलो कोस चला हु
जो निशान ना मिले .........

अब जो पाया तुम्हे
ख़ुद को भूल गए है
वोह दिन वोह पल तुम्हारे
आँखों के सामने है .........

तुम दूर हो , पर पास भी
अकेले है हम , पर अहसास नही ...........

In English font
tum dur ho, par pass bhi
akele hai hum, par gum nahi
kisiko kya bataye ki hum kam nahi
chal rahe the bin manzil ke raaste par
khud ki khabar nahi

tumne hi to raasta bataya
manzil kya hai ye samjhaya
na samajh the hum abtak
pyar kya hai tumne dikhaya

deewana ban gaya hu
jo tum na mile
milo kos chala hu
jo nisha na mile

ab jo paaya tumhe
khud ko bhul gaye hai
woh din woh pal tumhaare
aankho ke samne hai

tum dur ho, par pass bhi
akele hai hum, par ahsaas nahi

Saturday, August 29, 2009

Am i right!!!

वोह था I-day!!! Right!
दिन था bright,सब कर रहे थे fight,
उडाई kite और पेचा मारे tight,
वोह भी थी height, जब कटी kite,
जीते fight पर हो गयी थी night,
so stopped flying kite.

Took some diet, एक दम lite,
slept tight but bed bug bite,
Monday morning and no respite,
got late to office since every crossing met red light,
can't do anything, just nail bite,
Am i right!!

Lord Krishna


When I started sketching it, I was a bit confused about from where to start! I thought start from crown but then I analyzed that it will take more space. The moment I started with the eyes, simultaneously i started re-creating the sketch in my mind too. The picture on left depicts basic sketch of face .




The following picture shows the final sketch.


Saturday, August 8, 2009

my sis



Monday, July 27, 2009

Yuva kendra

jaisa mere bhai logo ne kaha

mil gaye mujhe selfless friend,
life me aaya ek naya trend,
Money huya banned,
vicharo ko nahi karte bend,
Monday ko sab karte hai attend,
so see you there then..........

With regards,
Neeraj

Tuesday, June 2, 2009

तुम आए हो!! (tum aaye ho)

हिन्दी भाषा में !!!!!

तुम आये हो
लागे! फ़रिश्ता बनकर आए हो
जीवन में नई उमंगें आई हो.....

सुखा था जीवन हमारा
पत-ज्ह्र्र का मौसम था छाया
लागे! बंजर ज़मीन की आस जगाई हो
जीवन में मेरे नई तरंग आई हो.....

बहने लगे है फिरसे जरने
कलियाँ भी खिल-खिलाई
हवा में जुमे है भवरे
लागे! बसंत ऋतू है आई.....

तुम आए हो
लागे! फ़रिश्ता बनकर आए हो
जीवन में नई उमंगें आई हो.....

In English Font

Tum aaye ho
Laage! Farishta bankar aye ho
Jeevan me nayi umange laayi ho.....

Sukha tha jeevan humara
Pat-jarg ka mausam tha chaya
Laage! Banjar zameen ki aas jagayi ho
Zeevan me mere nayi tarang aayi ho.....

Behne lage hai firse jarne
Kaliyaa bhi khil-khilayi
Hawa me joome hai bhaware
Laage! Basant ritu hai aayi.....

Tum aaye ho
Laage! Farishta bankar aye ho
Jeevan me nayi umange aayi ho.....

Tuesday, May 19, 2009

ख्वाब इट्स मी(khwaab its me)

हिन्दी भाषा में!!!
कहा था उसने ख्वाब इट्स मी........
पर जाने कहा है वोह अभी........
वोह जो थी मेरी दीवानी........
जिसे मैंने ना जाना........
जनता न था कि कभी यह होगी जिंदगानी........
बन जायेगी मेरी एक कहानी........

कहा था उसने ख्वाब इट्स मी........
अब कहता हु लेट्स सी........
जगता हु रात सारी........
घूमा हु गली गली........
पर मिलती नही तू कही........
सोचता हु तोह सुनता हु ख्वाब इट्स मी........

कभी कभी लगता है........
पा लिया हो तुझे दिल कहता है मुझे........
सब आपना सा लगने लगता है........
जो आँखे बंद करता हु........
तोह तुम कहती हो ख्वाब इट्स मी........

In English Font

kaha tha usne khwaab its me........
par jane kaha hai woh abhi........
woh jo thi meri deewani........
janta na tha ki kabhi yeh hogi jindagani........
ban jayegi meri ek kahani........

kaha tha usne khwaab its me........
ab kahta hu lets see........
jagta hu raat saree........
ghooma hu gali gali........
par milti na tu kahi........
sochta hu toh sunta hu khwaab its me........

kabhi kabhi lagta hai........
paa liye ho tujhe dil kahta hai mujhe........
sab aapna sa lagne lagta hai........
jo aakhe band karta hu........
toh tum kahti ho khwaab its me........

Friday, May 1, 2009

आज बारिश में.....(Aaj barish me)

हिन्दी भाषा में!!
आज बारिश में झूम रहा हु........
जैसे आसमान में पतंग!!!!
आज खुशी में झूम रहा हु........
जैसे सागर में उठी तरंग!!!!
आज यादो में तुमसे मिल रहा हु........
जैसे रंगोली के रंग!!!!
आज बारिश में झूम रहा हु........
जैसे आसमान में पतंग!!!!

बारिश गई तो धुप है आयी........
रौशनी की किरणे है छाई!!!!
जाने कैसी है ये किरणे छाई........
आसमान को संग है लाई!!!!
आखो में है नरमी छाई........
फ़िर बारिश की याद है आयी!!!!
बारिश गई पर धुप है आयी........
बीती यादें जो संग है लाई!!!!

In English Font

Aaj barish me jhoom raha hu........
Jaise aasmaan me patang!!!!
Aaj khushi me jhoom raha hu........
Jaise sagar me uthi tarang!!!!
Aaj yaado mein tumse mil raha hu........
Jaise rangoli ke rang!!!!
Aaj barish me jhoom raha hu........
Jaise aasmaan me patang!!!!

Barish gayi to Dhoop hai aayee........
Roshni ki kirane hai chaayee!!!!
Jaane kesi se hai yeh kirane chaayee........
Aasma ko sang hai laayee!!!!
Aakho me hai narmi chayee........
Fir barish ki yaad hai aayee!!!!
Barish gayi par Dhoop hai aayee........
Beeti yaadein sang jo hai laayee!!!!